गुरुवार, 17 जून 2010

कार्टून:- ले, और लिक्खेगा कविता ?


41 टिप्‍पणियां:

  1. हा हा!! राम त्यागी बंधे बैठे हैं. :)

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  2. बहुत बढ़िया काजल जी....सही दर्शाया

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  3. ...और आलमारी के ऊपर आपसे पहले मित्र हैं !

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  4. ...और आलमारी के ऊपर आपसे पहले मित्र हैं !

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  5. ...और आलमारी के ऊपर आपसे पहले मित्र हैं :)

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  6. मजेदार...कवियों को यह भेजें...

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  7. समीर जी द्वारा आज पकड़ ही लिया गया त्यागी जी को...

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  8. जैसे को तैसा मिला, बड़ा मज़ा आया.

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  9. बहुत नाईंसाफ़ी है ठाकुर।
    ले, फ़िर आयेगा किसी कवि के घर?

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  10. हँसी नहीं रोक पा रहा ....वैसे अलमारी के ऊपर वाला पिंजर देखकर डर लागे है बहुत ....
    क्यूँ हमारे समीर जो को बदनाम कर रहे हो भाई :-)

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  11. कवियों के मित्र होना इतना खतरनाक~!बस..अलमारी के ऊपर रखी खोपड़ी ही दिखाई दी..वैसे गायक और कवि दोनों एक ही श्रेणी के हैं ...उनके मित्र डर डर के रहते हैं..कहीं कविता/गाना न शुरू कर दे .:)

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  12. अब जाकर मिली है...जबसे हम समीर जी के घर से आये हैं ...हमारी खोपड़ी नहीं मिल रही थी...समीर जी ने आलमारी के ऊपर रख दी.....
    बहुत बेइंसाफी है....
    हे राम...!!
    बहुत बढ़िया ...हा हा हा हा हा हा
    हा हा हा हा हा
    मेरी भी हंसी नहीं रुक रही है....!!
    हा हा हा हा हा ...
    बहुत ही बढ़िया...आपको दो-चार ट्रक बधाई दे रहे हैं...
    हाँ नहीं तो...!!

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  13. आह सुबह सुबह कलेजा बैठ गया !हंसने की हिम्मत भी नहीं हो रही !

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  14. अदा जी की खोपड़ी है..और मैं नाहक परेशान था कि जाने किसकी रह गई.

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  15. हा हा हा !
    लो जी हमने भी कसम तोड़ दी
    टूटी फूटी जो लिखते थे ,
    आज से वो भी छोड़ दी ।

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  16. एक नंबर कार्टून...सर....छा गए

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  17. सच कहा काजल जी । एक बार एक कवि ने कमरा बंद कर ऐसे ही मुझ पर डेढ़ सौ कविताएं फटकार दी थीं । बेहोश होते होते रह गया था उस दिन । हो जाता तो अच्छा होता । उस पीड़ा से मुक्ति तो मिलती ।

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  18. अब हम क्या बोलें.कविता सुनने वालों के ऊपर जुल्म की बातें हो रही हैं.पर कविता लिखने वालों पे जो जुल्म हो रहा है उसका क्या?!!!हा हा!!

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  19. हा हा हा बांध बांध कर कविता सुनाई जा रही है । बस ये और पता चल जाता कि पैग उडन जी ने उनको टेप हटा कर लगवाई थी या टेप में ही स्ट्रा घुसेड कर :) :) :) :) :) :) :) :)

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  20. हा हा हा काजल जी आप तो कवि नहीं हैं ना....... डरा दिया

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  21. सुना लो भाई. तुम्हारी भी बारी आयेगी.

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  22. बहुत सुन्दर। इसीलिए मैंने कविता लिखनी बहुत पहले बंद कर दी है।
    --------
    भविष्य बताने वाली घोड़ी।
    खेतों में लहराएँगी ब्लॉग की फसलें।

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  23. समीर जी यह लठ्ठ किस लिये? आप ने राम त्यागी के हाथ पेर तो पहले से ही बांध दिये :) अब हमे तो डर लग रहा है....अगर कभी कोई कवि मुझे प्लेन मै मिल जाये तो??

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  24. kajalji bahut samay se dekh raha hun aapke kartoon ghise pite vishayo par hi ban rahe hai, 33 tippaniya dekh kar aisa nahi lag raha hai, par yakeen maaniye isme kuch bhi naya nahi hai aur dekhne-padne par muskaan bhi nahi aati

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  25. बहुत बढिया।
    ---------
    क्या आप बता सकते हैं कि इंसान और साँप में कौन ज़्यादा ज़हरीला होता है?
    अगर हाँ, तो फिर चले आइए रहस्य और रोमाँच से भरी एक नवीन दुनिया में आपका स्वागत है।

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  26. बड़ा ही सटीक कार्टून

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  27. खो गई है
    मेरी कविता
    पिछले दो दशको से.
    वह देखने में, जनपक्षीय है
    कंटीला चेहरा है उसका
    जो चुभता है,
    शोषको को.
    गठीला बदन,
    हैसियत रखता है
    प्रतिरोध की.
    उसका रंग लाल है
    वह गई थी मांगने हक़,
    गरीबों का.
    फिर वापस नहीं लौटी,
    आज तक.
    मुझे शक है प्रकाशकों के ऊपर,
    शायद,
    हत्या करवाया गया है
    सुपारी देकर.
    या फिर पूंजीपतियो द्वारा
    सामूहिक वलात्कार कर,
    झोक दी गई है
    लोहा गलाने की
    भट्ठी में.
    कहाँ-कहाँ नहीं ढूंढा उसे
    शहर में....
    गावों में...
    खेतों में..
    और वादिओं में.....
    ऐसा लगता है मुझे
    मिटा दिया गया है,
    उसका बजूद
    समाज के ठीकेदारों द्वारा
    अपने हित में.
    फिर भी विश्वास है
    लौटेगी एक दिन
    मेरी खोई हुई
    कविता.
    क्योंकि नहीं मिला है
    हक़.....
    गरीबों का.
    हाँ देखना तुम
    वह लौटेगी वापस एक दिन,
    लाल झंडे के निचे
    संगठित मजदूरों के बिच,
    दिलाने के लिए
    उनका हक़.

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  28. हा हा हा
    काजल कुमार हमेशा ही मजेदार बनाते हैं. 󾍘󾍘󾍘󾍘󾍘
    बेचारा आदमी...!!!!!!!!!
    च्च्च्च्च.!!!!!!!!!!!!!

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