शनिवार, 14 मार्च 2009

ओह...कहीं आपके साथ तो ऐसा नहीं हुआ ?

आज से इस ब्लॉग की छुट्टी ख़त्म हुई. अब आपका यहाँ रोज़ स्वागत है...

4 टिप्‍पणियां:

  1. इसे कहते है लेने के देने पड़ना.

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  2. सर्वनाम इसी तरह संज्ञा बन जाते हैं।

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  3. ये तो बेचारे के साथ बहुत गलत हुआ.:)

    आशा है आपके ब्लाग की छुट्टियां आनन्द पुर्वक बीती होंगीं?

    रामराम.

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