शनिवार, 20 फ़रवरी 2010

कार्टून:- सच बताना, यह बस आपने भी देखी है न !

27 टिप्‍पणियां:

  1. हा हा हा ! काजल ली , भारतीय बसें कब कहाँ मुड जाएँ , कोई भरोसा नहीं।
    और तो और नाम बदलने से भी कोई फर्क नहीं पड़ता।

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  2. काजल भाई
    आज के कार्टून के लिए दो टिप्पणियां छोड़ रहा हूँ जो उचित लगे क़ुबूल करियेगा !
    (१) ये बस...बेबस ...मंत्रिमंडल सी !
    (२) इस करके तो ये कौनो धाम न पहुंचेगी !

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  3. ...यह कार्टून विचारणीय है!!!!!!!!!!!!!

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  4. भारतीय बसों को हमेशा दो दिमाग ड्राईव करते हैं. और कहीं राजी खुशी पहुंच जाये तो ये सवारियों की किस्मत से संभव होता है.

    बहुत जबरदस्त.

    रामराम.

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  5. हा हा हा हा ये भी खूब रही....

    regards

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  6. इस टिप्पणी को लेखक द्वारा हटा दिया गया है.

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  7. एक तरफ का बाहर निकला हाथ खुद को मंजिल पर पहुचाने के लिए होता है और दूसरी तरफ का दूसरो को ठिकाने पर :)

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  8. हें हें हें, यह जिधर चाहो मुड़ जाओ तकनीक है. :)

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  9. सच में! ऎसी बसें तो हर रोज देखते हैं :)

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  10. नाईस जी नाईस, बहुत सुंदर, यह काग्रेस वालो की बस तो नही??

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  11. यह नई तकनीक है, आपको नहीं पता तो इसमें ड्राइवर और कंडक्टर का क्या दोष. ड्राइवर बस मोड़ना चाहता है, लेकिन तभी कंडक्टर को सवारी दिखाई दे गई, उस सवारी को इशारा कर रहा है कि जल्दी चढ़.:D

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  12. हा हा हा ! बिल्कुल सही कहा है आपने! ऐसी ही स्थिति है हमारे देश की ! बहुत ही बढ़िया कार्टून बनाया आपने !

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  13. हा हा हा ..बहुत खूब काजल जी , और कमाल की बात तो ये है कि चाहे किसी भी तरफ़ मुडे ..इनका निशाना मतलब शिकार नहीं बच सकता ....उसे तो बस के नीचे लाकर ही मानते हैं ...
    अजय कुमार झा

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  14. वाह! दोनो के यूं हाथ दिखाने का मतलब शायद यह हो कि बैक हो रही है बस! :)

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  15. ha ha ha ..
    sahi hai..na sirf mud jaaye..kahan chadh jaaye ye bhi nahi pata...bahut khoob..

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