सोमवार, 15 फ़रवरी 2010

कार्टून:- पुणे से आई अमन की आशा :-)


26 टिप्‍पणियां:

  1. वे अपना काम मुस्तैदी से करते हैं तो हम अपना अधिक मुस्तैदी से क्यों न करें? अमन निश्चित रूप से आतंक फैलाने से कई सौ गुना कठिन काम है।

    जवाब देंहटाएं
  2. व्यंग काफी जोरदार किया।

    जवाब देंहटाएं
  3. टिप्पणी इतनी कि दिनेश जी की बात में दम है , पर इससे आगे ये कि मैं पहले भी कह चुका हूँ कि आपके कैरेक्टर्स की बाडी लैंगुएज कमाल होती है और उसपर आपने मुहावरा (आग..) भी विजुअलाइज कर दिया ! आपकी रचनाधर्मिता के यूंहीं तो कायल नहीं हैं हम !

    जवाब देंहटाएं
  4. इस बारे में कुछ पता नहीं है...इसलिए बिना जाने पर्तिक्रिया व्यक्त करना सही नहीं होगा ...
    वैसे आपके कार्टून हमेशा बढ़िया ही होते हैं :-)

    जवाब देंहटाएं
  5. किरण जी ,
    पाकिस्तान की कथनी और करनी का बेहूदा फर्क बा-खूबी नुमाया करता आपका ये कार्टून हिदुस्तान के नुमायिन्दो की अक्ल पर पड़े पत्थर की भी दर्दनाक बेवकूफी बयान करता है , ना जाने वो सुनहरा दिन कब आये गा जब हिन्दुस्तान के आला दिमाग हुक्मरानों को अपनी मनहूस बेवकूफी से निजात मिले गी , वैसे मुझे नहीं लगता की वो खुशनुमा दिन जल्दी आ पाए गा /

    जवाब देंहटाएं
  6. i am really very sorry for calling you 'kiran ji' despite of kajal ji.
    i suppose you would appreciate the slip of pen.
    thanks.

    जवाब देंहटाएं
  7. अमन फैलाना सौ गुना कठीन है तो एक चाँटा क्यों नहीं धर देते? बात यह है कि दानव को मानव नहीं बनाया जा सकता तो फिर कोशिश छोड़ो.

    सही रोष व्यक्त किया है आपने.

    जवाब देंहटाएं
  8. घटना को बहुत सटीक अभिव्यक्त किया है आपने, नमन आपकी रचनाधर्मिता को.

    रामराम.

    जवाब देंहटाएं
  9. बहुत बढ़िया सामयिक प्रस्तुति ...

    जवाब देंहटाएं
  10. करूँ क्या आस निरास भई।
    घुघूती बासूती

    जवाब देंहटाएं
  11. सही बात है , कील भी ठोक दी और ----!!!

    जवाब देंहटाएं
  12. सही बात है , कील भी ठोक दी और ----!!!

    जवाब देंहटाएं
  13. काजल जी
    आपका यह कार्टून पुरुस्कार के योग्य है, बहुत बहुत प्रसंशनीय !!!
    श्याम कोरी 'उदय'

    जवाब देंहटाएं
  14. द्विवेदी जी अमन फ़ैलाना कठिन काम है यह कठिन काम तो हम बरसों से कर ही रहे हैं अब कम से कम एक बार तो आसान काम करके देखें… आखिर कब तनकर सीधे खड़े होना सीखेगा यह देश…?

    जवाब देंहटाएं
  15. हम गांधी बाबा के रास्ते पर तो शुरु से चल रहे है, एक बार नेता जी सुभाष चंद्र बोस ओर भगत सिंह के रास्ते पर चल कर भी देखो

    जवाब देंहटाएं
  16. हाँ ये बम विस्फोद अमन का ही तो संकेत था ......यहाँ तो हर रोज़ अमन का सामान मिलता है .....!!

    जवाब देंहटाएं
  17. द्रव के रंग से तो लगता है कि इस बन्दे को पीलिया है। नहीं है तो हो जायेगा! :)

    जवाब देंहटाएं

LinkWithin

Blog Widget by LinkWithin