शनिवार, 19 मई 2012

कार्टून :- ये लो और सुनो नया फ़ंडा सरकार का


13 टिप्‍पणियां:

  1. ...अरे भई,चलते-चलते ही तो साठ साल पार कर गई है !

    जवाब देंहटाएं
  2. उत्तर
    1. ...गोदि‍याल जी, कुछ लोगें ने तो धंधा ही बना लि‍या था रोज़ मेरे ब्‍लॉग से कार्टून उठाकर अपने अख़बारों में लगातार छाप लेने का. पता नहीं कि‍स ग़लतफ़हमी में जी रहे हैं ये लोग जि‍न्हें लगता है कि‍ ब्‍लॉग पर छपा तो मुफ़्त का माल हो गया और ये भी कि‍ ब्‍लॉगों पर तो जैसे छपास के मारे लोग ही लि‍खते फि‍रते हैं.

      भूतनी के... कागज, स्‍याही, बि‍जली, प्रिंटि‍ग, फ़ोन, गाड़ी, डाक बगैहरा खर्चा तो देंगे पर कंटेंट-प्रोवाइडर पर जैसे एहसान करते हैं मुफ़्त में उसके रचनाकर्म पर हाथ साफ करके. अंटी से चवन्‍नी नि‍कालते जान नि‍कलती है और दुनि‍या भर के फ़ंडे याद आने लगते हैं इन्‍हें, यहां-वहां बघारने के लि‍ए. उन्‍हीं के लि‍ए है Legal Stuff.

      हटाएं
  3. Govt. can stoop very low for its survival. But only the fittest will survive.

    जवाब देंहटाएं
  4. सही बात ...........मान ली जाए तो सरकार का ही भला होगा ..

    जवाब देंहटाएं
  5. बहुत अच्छी प्रस्तुति!
    इस प्रविष्टी की चर्चा कल रविवार के चर्चा मंच पर भी होगी!
    सूचनार्थ!

    जवाब देंहटाएं
  6. नायाब आईडिया ..इस शोध पर नोबेल पुरस्कार दे देंगे आपको सारे सांसद मिलकर :)

    जवाब देंहटाएं
  7. कुमारजी, आपके बनाये कार्टून बहुत ही रोचक एवं सही जगह पर चोट करते हुए होते हैं.

    जवाब देंहटाएं

LinkWithin

Blog Widget by LinkWithin