Sunday, November 6, 2011

कार्टून:- एक था लल्लू और था उसका घल्लू-मल्लू


14 comments:

  1. yahi balance to kar rahe hain tathakthit arth-shastri aaj kal..

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  2. हा हा! लोग घपले के शिखर पर इमानदारी का लेमनचूस लिये बैठे हैं! :)

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  3. हा हा हा ! अब चाहने पर भी प्रतिबन्ध लगेगा ?
    मियां , दस्तक देते हैं, हम द्वार खोलते हैं , देखते हैं कोई नहीं । :)

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  4. मन्नू के चाहते लोगों का चाहना कहाँ हो पा रहा है

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  5. अर्थशास्‍त्री जो ठहरे!

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  6. बहुत सुन्दर!
    देवोत्थान पर्व की शुभकामनाएँ!

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  7. पर यहाँ सैलरी तो बढती है चवन्नी और महंगाई बढती है दो रुपया|

    Gyan Darpan

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  8. जिनको पगार नहीं मिलती बॉस उसका क्या?

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  9. बहुत अच्छी प्रस्तुति !

    मेरे नए पोस्ट पर आपका स्वागत है,कृपया अपने महत्त्वपूर्ण विचारों से अवगत कराएँ ।
    http://poetry-kavita.blogspot.com/2011/11/blog-post_06.html

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  10. सुंदर पोस्ट.आपका कार्टून बहुत पसंद आया,
    मेरे पोस्ट में स्वागत है....

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  11. बहुत उम्दा!
    --
    आपकी इस प्रविष्टी की चर्चा कल मंगलवार के चर्चा मंच पर भी की गई है! सूचनार्थ!

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