रविवार, 8 मई 2011

कार्टून:- माऽऽऽऽऽर गिराके....



38 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत बढ़िया :) बच्चों के मन की कह दी आपने ....

    जवाब देंहटाएं
  2. लगता है हाल फिलहाल आपका साबका किसी बच्चे से पड़ा है :)

    मस्त :)

    जवाब देंहटाएं
  3. वाह! जी वाह! चोर चोरी से जाये पर हेरा फेरी से न जाये.

    जवाब देंहटाएं
  4. वाह जी! होमवर्क दिया तो मास्टरजी 'सेडिस्ट' हो गये? हा हा हा वैसे ये स्कूल्स वाले छुट्टियों में भी बच्चो और उनके पेरेंट्स को चैन से जीने क्यों नही देते? सही समय पर सही बात पकड़ी है बन्धु ! जियो हा हा

    जवाब देंहटाएं
  5. एक दम धांसू फ़ांसू है ..बस्ता पटक देना चाहिए था मास्साब के छाती पे ..ताकि बच्चा के कलेजे को ठंडक पहुंचती रहती गर्मी के छुट्टी में

    जवाब देंहटाएं
  6. मास्टरा नू इज्जत देवंन् दा शुक्रिया काजल जी :)

    जवाब देंहटाएं
  7. अरे इत्ता भी नहीं समझे । मास्टर जी ने अपनी दुकान का पता भी तो दिया था जहाँ सारा होम वर्क किया कराया मिल जाता है । :)

    जवाब देंहटाएं
  8. मेहनत के बाद साँस लेने का अधिकार हो संविधान में।

    जवाब देंहटाएं
  9. क्या बात है :)))

    वैसे दराल सर की बात गौर करने वाली है.

    सादर

    जवाब देंहटाएं
  10. लगता है आपके बच्चों को कुछ अधिक ही होम वर्क मिला है।

    जवाब देंहटाएं
  11. :) सच है बच्चों को चैन की साँस नहीं लेने देता यह होमवर्क

    जवाब देंहटाएं
  12. होमवर्क मानो यमराज. बच्चों का भी कोई कसूर नहीं.

    मेरे ब्लॉग दुनाली पर देखें-
    मैं तुझसे हूँ, माँ

    जवाब देंहटाएं
  13. अरे बुद्धु, वो मास्टर तो अलगे बरस बदल जाएगा :)

    जवाब देंहटाएं
  14. वाकई सोचने की बात है की छुट्टिया बच्चो के मौज मस्ती के लिए होते है या पढ़ने के लिए |

    जवाब देंहटाएं
  15. अरे अरे छोड दे मास्साब को

    जवाब देंहटाएं
  16. आज तो बच्चे आपको धन्यबाद कहेंगे.

    जवाब देंहटाएं
  17. :) क्या करें होमवर्क तो देना ही पड़ता है बच्चों!
    हाँ ज़रा कम देना चाहिए .
    ......

    जवाब देंहटाएं
  18. अधिकतर मास्टरों के बच्चे नाकारा निकल जाते हैं। बेचारे क्या करें!

    जवाब देंहटाएं
  19. तमाम तरह की कुंठाओँ में जी रहे मास्टरों को छुट्टी के बाद अपनी भड़ास निकालने का बहाना भी तो चाहिए!

    जवाब देंहटाएं
  20. फिर से आना पड़ा
    ऐसा कुछ नहीं है कोई कुंठा नहीं कोई भड़ास खुंदक नहीं होती
    ये पाठ्यक्रम का ही भाग है

    जवाब देंहटाएं
  21. @ दर्शन लाल बवेजा जी
    आपने देखा होगा कि मैं आमतौर पर counter argument नहीं करता क्योंकि मैं अपने पाठकों की भावनाओं का आदर करता हूं. आपकी दोनों ही प्रतिक्रियाओं का स्वागत है :-)

    जवाब देंहटाएं
  22. आपने अनजाने में मास्टरजी की असली फोटू छाप दी है,पर ऊ बच्चा तो इस समय क्लास-वर्क कर रहा है !

    जवाब देंहटाएं
  23. हा हा ...आप भी खूब है ...छोटे बच्चे की बात आपने बोल दिया

    जवाब देंहटाएं
  24. सही चित्रण है हालात का| धन्यवाद|

    जवाब देंहटाएं
  25. और मार साले को .....काहें तुझे शिष्य बनाया ?

    जवाब देंहटाएं
  26. बहुत बढ़िया ! बच्चों की मन की बात को आपने बहुत सुन्दरता से प्रस्तुत किया है! बेचारा मास्टर जी!

    जवाब देंहटाएं
  27. अच्छा है हम मास्टर न हुये

    जवाब देंहटाएं
  28. गर्मी की छुट्टियों से दुश्मनी । इसकी सजा मिलेगी... बराबर मिलेगी ।

    जवाब देंहटाएं
  29. टकारती बाई बड़ी अपनी सी लगती है ,भैया जी पीछे मुंहभाई काजल कुमारजी ,व्यवस्था गत मानसिक दिवालियापन ने मास्टर को सचमुच पर -पीडक ही बना दिया है ।
    इससे अगले कार्टून में आपने पत्नी -पीड़ित समाज को बड़ी राहत पहुंचाई है ।
    पत्नी को फ लिए खड़ें हैं ,मनमोदक फूट रहें हैं ,मन -मयूर नांच हुआ है -मन मोर हुआ मतवाला किसने जादू डाला .
    हास्य व्यंग्य विनोद से संसिक्त हैं यह कार्टून .

    जवाब देंहटाएं

LinkWithin

Blog Widget by LinkWithin