मंगलवार, 28 दिसंबर 2010

कार्टून:- चेला चीनी हुआ चाहता है बाबा को गुड़ बनाकर !


25 टिप्‍पणियां:

  1. ये भी बाबा की तरह पेट अन्दर-बाहर करने लग जाएँ ...भीड़ अपने आप जुटनी चालू हो जाएगी

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  2. काजल जी ब्लॉग पे भीड़ जुटाने का मंत्तर आप मुझे भी दे दो। :-)

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  3. हा हा हा भीड़ खेंचु ताबीज और मंतर चाहिए

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  4. वैसे सर्दियों में गुड की चाय ही भाती है जी....:)

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  5. उसके लिए पहले मुझे एग्रीगेटर बनाना पडेगा बच्चा :)

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  6. ये मन्त्र तो आजकल बाबा लोगों के पास ही हैं ।

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  7. ना बाबा ना ..मंतर सीख कर यह चेला छू मंतर हो जाएगा ,हाथ न आयेगा !

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  8. गर पत लग जाये तो हमे भी बताना जी

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  9. baba ke ls gur ke liye chele ko bhi baba banna padega.. he he :)

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  10. बहुत बढ़िया.
    सादर,
    डोरोथी.

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  11. नेताजी को शायद ये नहीं मालूम कि आजकल भीड़ जुटने पर भी जनता दगा दे जाती है। राहुल बाबा का बिहारी दौरा में भीड़ तो काफी उमड़ी पर सीटों की संख्या सिफ़र के करीब ही रही।

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  12. बहुत सुन्दर कार्टून आप बनाते हैं.
    देख कर मज़ा आ जाता है

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  13. इस लिए नेता बाबाओं के पास जाते हैं।

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  14. :)
    ............

    ****......नववर्ष की हार्दिक शुभकामनाएँ...****

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  15. अनगिन आशीषों के आलोकवृ्त में
    तय हो सफ़र इस नए बरस का
    प्रभु के अनुग्रह के परिमल से
    सुवासित हो हर पल जीवन का
    मंगलमय कल्याणकारी नव वर्ष
    करे आशीष वृ्ष्टि सुख समृद्धि
    शांति उल्लास की
    आप पर और आपके प्रियजनो पर.

    आप को सपरिवार नव वर्ष २०११ की ढेरों शुभकामनाएं.
    सादर,
    डोरोथी.

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  16. सही चरणों में पंहुचा है बच्चा ... !

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  17. सुदूर खूबसूरत लालिमा ने आकाशगंगा को ढक लिया है,
    यह हमारी आकाशगंगा है,
    सारे सितारे हैरत से पूछ रहे हैं,
    कहां से आ रही है आखिर यह खूबसूरत रोशनी,
    आकाशगंगा में हर कोई पूछ रहा है,
    किसने बिखरी ये रोशनी, कौन है वह,
    मेरे मित्रो, मैं जानता हूं उसे,
    आकाशगंगा के मेरे मित्रो, मैं सूर्य हूं,
    मेरी परिधि में आठ ग्रह लगा रहे हैं चक्कर,
    उनमें से एक है पृथ्वी,
    जिसमें रहते हैं छह अरब मनुष्य सैकड़ों देशों में,
    इन्हीं में एक है महान सभ्यता,
    भारत 2020 की ओर बढ़ते हुए,
    मना रहा है एक महान राष्ट्र के उदय का उत्सव,
    भारत से आकाशगंगा तक पहुंच रहा है रोशनी का उत्सव,
    एक ऐसा राष्ट्र, जिसमें नहीं होगा प्रदूषण,
    नहीं होगी गरीबी, होगा समृद्धि का विस्तार,
    शांति होगी, नहीं होगा युद्ध का कोई भय,
    यही वह जगह है, जहां बरसेंगी खुशियां...
    -डॉ एपीजे अब्दुल कलाम

    नववर्ष आपको बहुत बहुत शुभ हो...

    जय हिंद...

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  18. नये वर्ष की अनन्त-असीम शुभकामनाएं.

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  19. बस गेटअप बदलने का ही फर्क है जब उसे इतना भी नहीं पता तो भीड़ क्या ख़ाक जुटाएगा :)

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