Saturday, November 24, 2012

कार्टून :- ज़िंदा क़ौमें ताका करती हैं यहॉं


12 comments:

  1. lagta hai aane vaale vaqt me sirf tasveeren rah jaayengi

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  2. ....आज भी वो देश के नाम पर ही सब कुछ कर रहे हैं !

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  3. nice sir....

    सुबह मेरे दिमाग में भी आया था विचार। एक बच्‍चा अपनी मां से पूछता है, मम्‍मी देखो, नेता इतने बड़े हो गए, फिर भी छुटटी मारते हैं संसद में नही जाते, और जिसको जाना ही पड़ता है स्‍कूल

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  4. अब नीतियाँ ही नहीं हैं ....

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  5. बहुत सुन्दर प्रस्तुति!
    आपको सूचित करते हुए हर्ष हो रहा है कि-
    आपकी इस प्रविष्टी की चर्चा कल रविवार (25-11-2012) के चर्चा मंच-1060 (क्या ब्लॉगिंग को सीरियसली लेना चाहिए) पर भी होगी!
    सूचनार्थ...!

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  6. स्मृतियों का संग्रहालय..

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  7. जमा जूतियाँ सैकड़ों, टूटी कुर्सी मेज ।

    माइक गाली शोर भी, रखते रहे सहेज ।

    रखते रहे सहेज, कालिमा नोट चुटकुले ।

    कितनी लानत भेज, दिखाते खुद को हलके ।

    चेले गुरु घंटाल, सरिस जो चली गोलियां ।

    नंगे भगे नवाब, पड़ी रह गई जूतियाँ ।।

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  8. आपकी उत्कृष्ट प्रस्तुति का लिंक लिंक-लिक्खाड़ पर है ।।

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  9. यही
    तो हैं भाग्य-विधाता !

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  10. देश के लिये? क्या बात करते हैं काजल भाई आप भी!!

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