Sunday, January 29, 2012

कार्टून:- दाखिलों के दिन फिर से आए रे


31 comments:

  1. करा लो, जवान माँ बाप जो हैं...

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  2. मिश्रा जी.. :D
    अभी तो इब्दिता-ए-इश्क है.... आगे देखिये क्या न करवायें ये स्कूल वाले...

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  3. kajal bhai....nahi sudhre sab.....pata nahi.....kaya hoga garivo ka.

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  4. मस्त, शानदार, जानदार, करारा कटाक्ष क्या-क्या लिखूं..प्रशंसा के लिए शब्द नहीं हैं..बस आनंद आ गया भाई काजल कुमार जी।
    ..बहुत बधाई इस कार्टून के लिए।

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  5. यानि हाए रे , हाए रे , हाए रे ! :)

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  7. :):) मैराथन तो प्रवेश कराते हुए ही हो जाती है ..

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  8. Ha,ha,ha! Ye bhee karva ke rahenge!

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  9. ब्लॉग बुलेटिन पर की है मैंने अपनी पहली ब्लॉग चर्चा, इसमें आपका कार्टून भी सम्मिलित किया है. आपसे मेरे इस पहले प्रयास की समीक्षा का अनुरोध है.

    स्वास्थ्य पर आधारित मेरा पहला ब्लॉग बुलेटिन - शाहनवाज़

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  10. बच्चा पेट में आते ही शुरू हो जाती है यह मैराथन ये कशमकश ज़नाब .नतीज़ा ढ़ाक के वही तीन पात .
    कोलिज पहुँचते पहुँचते सब धान सत्ताईस सेर वैसे ही पगलाए रहतें हैं माँ बाप .स्टेटस सिम्बल बनाए हैं स्कूल को मदरसों को .

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  11. मकतबे इश्क (इश्क की पाठशाला )का दस्तूर
    निराला देखा ,
    उसको छुट्टी न मिली ,जिसने सबक याद किया .

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  12. सटीक बात....बहुत सही जो करवालेन यह स्कूल वाले वो कम है :)

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  13. अरविन्द जी को क्या हुआ :)

    शादी से पहले वाली मैराथन का नतीजा बाद वाली मैराथन ! आखिर को स्कूल वाले भी इसी मैराथन की फसल हैं ना :)

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  14. बाप रे!! पानी पीते पीते देखा और मुँह से पानी बाहर!! कमाल काजल भाई!!

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  15. अपने बाप का माल है,,, लूट लो!

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  16. लुटाने को तैयार लोगों को लूटने में क्या दिक्कत :)

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  17. यानी की बिलकुल निचोड़ लो।

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  18. शानदार और मनमोहक।

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  19. हां हां करा लो! फ़ुल मैराधन! :)

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  20. मुरगा तो बनाते ही हैं!

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  21. हा हा हा हा हा हा .....सही हैं


    हम तो बच गए भाई

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  22. माँ-बाप का मैराथन हो जाए तो स्पांसरशिप से आय हो जाएगी :))

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  23. आपका ब्लोग पसंद आया।
    मै विरल त्रिवेदी गुजरात पाटण। हिन्दी ब्लोग लिखना प्रारंभ कीया है। आपको निमंत्रित करता हुं। आपके मित्रो को भी निमंत्रित करे। शुभरात्रि...

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