मंगलवार, 25 नवंबर 2008

कविता: क्या मैं सही हूँ ?


चिट्ठाजगत अधिकृत कड़ी

जब से मैंने
अपने धर्म के खाने में
"अहिंसा" लिखा है,
मेरे दरवाज़े के बाहर
गिद्धों की पूरी जमात
आ जुड़ी है.

उनकी आँखों में रोशनी है
और चोंच में लार.

मैं असमंजस में हूं
कि मैने ऐसा क्या न्योता
दे डाला !
धरमांतरण, धरमांतरण कराने वालों की मूर्खता है और करने वालों का लालच / मजबूरी. धर्म और कुछ भी करता हो, पर जोड़ता तो कतई नहीं है ... वरना समानधर्मी ईसाई, मुस्लिम या ऐसे ही दूसरे देश आपसी युद्ध कभी नहीं करते.