शनिवार, 27 अप्रैल 2013

कार्टून :- ...सोने की िचड़िया चांदी के जाल


16 टिप्‍पणियां:

  1. समय तू धीरे धीरे हिल
    नींद आकर जगा न दे
    सोना आकर गिरा न दे

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  2. बहुत सुन्दर प्रस्तुति...!
    आपको सूचित करते हुए हर्ष हो रहा है कि आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा आज शनिवार (27-04-2013) कभी जो रोटी साझा किया करते थे में "मयंक का कोना" पर भी है!
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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  3. मित्र, सचमुच व्यंग्य-चित्र कविता से भी लघु माध्यम है विचार-अभ्व्यक्ति का !आप के कार्टून्स को देख कर आनन्द आगया और रुचि उत्पन्न हो गयी है |

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  4. सोने की चिड़िया चांदी के जाल
    उठ जाग रे नेता !
    कि जनता है बदहाल .

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  5. बेहतरीन कटाक्ष!

    सोने की चिड़िया, चाँदी के जाल का जवाब नहीं..वाह!

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