रविवार, 12 फ़रवरी 2012

कार्टून:- वैलेंटाइन डे आयो रे...



27 टिप्‍पणियां:

  1. बढ़िया कटाक्ष है।
    धूल की आड़ में फूल बना रहे हैं बच्चे:)

    हाय, देखो पापा..!
    घबड़ाओ मत तुम्हें नहीं पहचानेंगे!

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  2. हा-हा-हा... फर्क ज्यादा नहीं है क्योंकि एक सार्वजनिक बैंक लूटता है दूसरा निजी यानी माँ-बाप का !

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  3. :):) बढ़िया ... वैसे आज कल सब खुलेआम होता है ...

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  4. बाजार ने तो इन्हें पहले ही लूट लिया है..

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  5. इस दिन लूटने नहीं लुटने जाते हैं।

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  6. वेलेण्टाइन डे की प्रमोद मुतालिक जी को शुभकामनायें।

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  7. आया जिनका आया
    म्हारा क्या आया क्या गया ??

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  8. परदे में रहने दो परदा जो उठ गया तो....:)

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  9. जब कमीने धर्म और संस्कृति के ठेकेदार इसकी दुकानदारी करते रहेगें तब तक यही हाल रहेगा...

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  10. हे, देख वो, इश्क छुप-छुप के फरमा रहे हैं
    है क्या मज़ा, दिल ही दिल में तो घबरा रहे हैं

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  11. हा हा हा बहुत बढ़िया छुप-छुप कर इश्क ऐसे ही फरमाया जाता है। तब साथ इश्क नहीं पकड़े जाने का डर ज्यादा साथ होता है। :):)

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  12. इस खास किस्म के चेहरा ढ़ांकू यंत्र से तो मुझे परिवार नियोजन के किसी सरकारी विज्ञापन जैसा आभास हो रहा है :)

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  13. हा हा हा हा हा .....
    बढिया हैं जी .............


    ये सब हम लोगो के वक्त क्यूँ नहीं था???????

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  14. हम चल रहे थे ,वो चल रहे थे

    मगर दुनिया वालों के दिल जल रहे थे .बात तो एक ही दिल लूटा किसी का या बैंक बेलेंस .अच्छा व्यंग्य .ये कमांडो दस्ते अब रोज़ प्रेम दिवस मदन उत्सव मनाते हैं .इस नकाब पोशियो का श्रेय चण्डीगढ़ शहर को जाता है .

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  15. नकाब पोश प्रेमी अब सब जगह हैं इनका प्रादुर्भाव चंडीगढ़ में हुआ .

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  16. @ veerubhai
    नहीं भाई साहब. चंडीगढ़ में नकाबपोश और फूहड़ हरकतें करने वाले कम ही हैं. अब युवा लोग जानते हैं कि चूमना गैर कानूनी नहीं है. वे पुलिस से भी भिड़ जाते हैं. रोज़ गार्डन में हाईकोर्ट के जज, नौकरशाह और वरिष्ठ पुलिस अधिकारी सैर करते हैं और ये युवा भी वहाँ सुशोभित होते हैं. कोई क्लैश या क्लेश नहीं.

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  17. कहीं बजरंगी चिर कुमारों की नजर न पद जाय :)

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  18. चेहरा ढकने के बजाये दोनों ने बुरका पहना होता तो धोखा देने में और भी सहूलियत होती --खुद को भी , माता-पिता को भी और समाज को भी ...."बुर्के में 'सेफ्टी एन्श्योर्ड' "

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