शुक्रवार, 7 सितंबर 2012

कार्टून :- ले और कर ले पीएच. डी.


28 टिप्‍पणियां:

  1. हम भी हिन्दी में पी.एच.डी. करने की सोच रहे हैं, अब क्या करें ?

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  2. इस पीएचडी से दूर रहकर अच्छा ही किया :)

    जो पी.एच.डी. नहीं कर पाए वे अब कार्टून देखकर पछतायेंगे नहीं :)

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  3. तो क्या साहित्यिकता /साहित्यकाई एक बीमारी नहीं हो सकती है ? :)



    श्वानेत्तर /श्वानोत्तर /श्वानीयता /श्वानोचित साहित्य वगैरह वगैरह :)

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  4. इसीलिये हम अपने नाम के आगे डॉक्टर नहीं लगाते, कहीं कोई अपना कुत्ता लेकर दिखाने आ गया तो :)

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  5. हाहाहा.. चलिए साहित्य में नहीं कुछ और में पीएचडी करेंगे... ;)

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  6. साला बड़ा डाक्टर बना फिरता है ... एक कुत्ता का इलाज नहीं कर पाया ... ;-)


    मुझ से मत जलो - ब्लॉग बुलेटिन ब्लॉग जगत मे क्या चल रहा है उस को ब्लॉग जगत की पोस्टों के माध्यम से ही आप तक हम पहुँचते है ... आज आपकी यह पोस्ट भी इस प्रयास मे हमारा साथ दे रही है ... आपको सादर आभार !

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  7. एक और बेहतरीन कार्टून के लिए बधाइयाँ !

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  8. बहुत अच्छी प्रस्तुति!
    इस प्रविष्टी की चर्चा कल शनिवार (08-09-2012) के चर्चा मंच पर भी होगी!
    सूचनार्थ!

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  9. वाह !!
    पीएच0 डी0 का अर्थ सही में
    पागल होकर दौड़ बताया जाता है
    जितना समय और मेहनत लगती है
    उतने में आदमी डाक्टर नहीं बन पाता है
    खुद मरीज एक हो जाता है
    ऎसे मैं कोई कुत्ता लेकर कैसे
    उसके पास चला जाता है ?

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  10. हमारे पास कुत्ता लेकर नहीं , कुत्ते काटे का जख्म लेकर ज़रूर आते हैं .

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  11. यह तो कुछ ज्यादती हो गई । बेचारे साहित्य के डाक्टर ।

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