यह कार्टून सिर्फ हँसाने के लिए नहीं, बल्कि सोचने के लिए भी मजबूर करता है। जब आस्था से जुड़े किसी मामले पर सवाल उठते हैं, तब लोगों का दर्द और चिंता दोनों बढ़ जाते हैं। बहरहाल, मेरा यहाँ आने का एक कारण और भी है। हम लोग मुंशी प्रेमचंद जी की आगामी पुण्यतिथी ३१ जुलाई २०२६ के अवसर पर प्रेमचंद महोत्सव के अंतर्गत "५० दिनों में ५० कहानियाँ" बनाने, सुनाने (और जुटाने की भी!) की ओर प्रयासरत है. अगर आपकी रूचि हो तो इस अभियान में आपका सहर्ष स्वागत है.
अधिक जानकारी आपको यहाँ मिल जाएगी - HindiDiscussionForum dot com धन्यवाद!
यह कार्टून सिर्फ हँसाने के लिए नहीं, बल्कि सोचने के लिए भी मजबूर करता है। जब आस्था से जुड़े किसी मामले पर सवाल उठते हैं, तब लोगों का दर्द और चिंता दोनों बढ़ जाते हैं। बहरहाल, मेरा यहाँ आने का एक कारण और भी है। हम लोग मुंशी प्रेमचंद जी की आगामी पुण्यतिथी ३१ जुलाई २०२६ के अवसर पर प्रेमचंद महोत्सव के अंतर्गत "५० दिनों में ५० कहानियाँ" बनाने, सुनाने (और जुटाने की भी!) की ओर प्रयासरत है. अगर आपकी रूचि हो तो इस अभियान में आपका सहर्ष स्वागत है.
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