शनिवार, 15 अक्तूबर 2011

कार्टून:- पिछड़ेपन की निशानी है ये


17 टिप्‍पणियां:

  1. कुछ दिखावे के लिए भी जश्न मनाते है

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  2. जीवन में कोई न कोई बहाना देखकर खुश हो लेना चाहिये।

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  3. बंदा जश्न मनाता हुआ तो नहीं लग रहा । :)

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  4. पिछडेपन की यही तो निशानी है और इसे मिटाने की कोशिश में न जाने कितने मां-बाप लगे रहते हैं :(

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  5. पिछड़े, ग़रीब और अज्ञानी? जिन्हें आधुनिक खतरों, रीति-रिवाज़ की जानकारी और तकनीक और उसके दुरुपयोगकर्ताओं तक पहुँच नहीं है।

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  6. बहुत बढ़िया कार्टून!
    --
    इसकी चर्चा कल रविवार के चर्चा मंच पर भी की गई है!
    यदि किसी रचनाधर्मी की पोस्ट या उसके लिंक की चर्चा कहीं पर की जा रही होती है, तो उस पत्रिका के व्यवस्थापक का यह कर्तव्य होता है कि वो उसको इस बारे में सूचित कर दे। आपको यह सूचना केवल इसी उद्देश्य से दी जा रही है! अधिक से अधिक लोग आपके ब्लॉग पर पहुँचेंगे तो चर्चा मंच का भी प्रयास सफल होगा।

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  7. 'पिछड़े' शब्द ने व्यंग्य की धार को कम किया है। पिछड़े गरीब होते हैं..वे नहीं मनाते। इसके स्थान पर
    ..रे मूर्ख! लड़की होने पर भी कोई जश्न मनाता है!!...होता तो मेरी समझ से करारा कटाक्ष होता।

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  8. कल 20/10/2011 को आपकी यह पोस्ट नयी पुरानी हलचल पर लिंक की जा रही हैं.आपके सुझावों का स्वागत है .
    धन्यवाद!

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  9. रो लेने में ही अगाड़ीपन है इस ग़रीब के लिए...बढ़िया कार्टून.

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  10. @ Geeta

    तथकथित पिछड़े समाजों में आज भी बेटी के जन्म पर बुरा नहीं मनाया जाता.

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