http://kajalkumar.tk
फारमूला शून्य के देसी लोग, फारमूला-१ की विलायती हसरत! जायें, वहां हसरत की तेरही की पूड़ी बंट रही है, खा आयें।
सटीक !!
घर में नहीं दाने अम्मा चली भुनाने ..शायद इसी को कहते हैं .
एक दिन न खायेंगे पर गर्व तो करेंगे।
वाह रे वाह! क्या कार रेस ही पार उतारेगी मेरे देश को.काजल भाई लगता है आप भी अटक गए हैं कहीं,वर्ना इतना न इंतजार करना पड़ता मुझे.अब न कहना कि १०० हो गयीं हैं,अब क्या कहूँ.
ग़रीब देश के लोगों ने ट्रैफिक जाम लगा दिया ।
Hmmm...yahee hai is jahan kee reet!
Beautifully expressed !
सटीक व सामयिक Gyan DarpanRajputsParinay
:-) Zordaar
:-) संगीता जी की बात से पूर्णतः सहमत हूँ। समय मिले कभी तो आयेगा मेरी पोस्ट पर आपका स्वागत है जहाँ इस बार की पोस्ट बड़ी ज़रूर है किन्तु आपकी राय चाहिए।
ऐसे ही गाडियां दौड़ा दौड़ा कर देश भी देश कि परिधि से बाहर निकल जायेगा
इससे बेहतर तरीके से कोई कार्टूनिस्ट अपने देश और लोगों के प्रति के सरोकार को और कैसे व्यक्त कर सकता है ...बेमिसाल !
चलिए.... अब इस पर सट्टा लगाते हैं :)
फारमूला शून्य के देसी लोग, फारमूला-१ की विलायती हसरत!
ReplyDeleteजायें, वहां हसरत की तेरही की पूड़ी बंट रही है, खा आयें।
सटीक !!
ReplyDeleteघर में नहीं दाने अम्मा चली भुनाने ..शायद इसी को कहते हैं .
ReplyDeleteएक दिन न खायेंगे पर गर्व तो करेंगे।
ReplyDeleteवाह रे वाह! क्या कार रेस ही पार उतारेगी
ReplyDeleteमेरे देश को.
काजल भाई लगता है आप भी अटक गए हैं
कहीं,वर्ना इतना न इंतजार करना पड़ता मुझे.
अब न कहना कि १०० हो गयीं हैं,अब क्या कहूँ.
ग़रीब देश के लोगों ने ट्रैफिक जाम लगा दिया ।
ReplyDeleteHmmm...yahee hai is jahan kee reet!
ReplyDeleteBeautifully expressed !
ReplyDeleteसटीक व सामयिक
ReplyDeleteGyan Darpan
RajputsParinay
:-) Zordaar
ReplyDelete:-) संगीता जी की बात से पूर्णतः सहमत हूँ।
ReplyDeleteसमय मिले कभी तो आयेगा मेरी पोस्ट पर आपका स्वागत है जहाँ इस बार की पोस्ट बड़ी ज़रूर है किन्तु आपकी राय चाहिए।
ऐसे ही गाडियां दौड़ा दौड़ा कर देश भी देश कि परिधि से बाहर निकल जायेगा
ReplyDeleteइससे बेहतर तरीके से कोई कार्टूनिस्ट अपने देश और लोगों के प्रति के सरोकार को और कैसे व्यक्त कर सकता है ...बेमिसाल !
ReplyDeleteचलिए.... अब इस पर सट्टा लगाते हैं :)
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