http://kajalkumar.tk
सबके अपने अपने काम!
...अब साल भर क्या करेंगे ?
बहुत सही निशाना लगाया है,कार्टून के माध्यम से!
आईडिया बुरा नहीं अगर हर दिन का अखबार विमोचित करके मेले का लुत्फ़ लिया जा सके :)
जी हाँ लत कैसी भी हो है बुरी .पुस्तक विमोचन का अपना चस्का है नशा है .
अब अगले साल..
Hahaha!
:)
देवि का दिवा स्वप्न !आधी आबादी जिंदाबाद!
ab akhbaar ... :)
उपलब्धि तो है ही।
अब पुस्तक छापने के लिए एक साल इंतजार करना पड़ेगा ।
:) Bahut Badhiya
यहाँ तो पुस्तक पढ़ने की लत अख़बार पर भारी दिख रही है. बहुत ख़ूब.
सबके अपने अपने काम!
ReplyDelete...अब साल भर क्या करेंगे ?
ReplyDeleteबहुत सही निशाना लगाया है,
ReplyDeleteकार्टून के माध्यम से!
आईडिया बुरा नहीं अगर हर दिन का अखबार विमोचित करके मेले का लुत्फ़ लिया जा सके :)
ReplyDeleteजी हाँ लत कैसी भी हो है बुरी .पुस्तक विमोचन का अपना चस्का है नशा है .
ReplyDeleteअब अगले साल..
ReplyDeleteHahaha!
ReplyDelete:)
ReplyDeleteदेवि का दिवा स्वप्न !आधी आबादी जिंदाबाद!
ReplyDeleteab akhbaar ... :)
ReplyDeleteउपलब्धि तो है ही।
ReplyDeleteउपलब्धि तो है ही।
ReplyDeleteअब पुस्तक छापने के लिए एक साल इंतजार करना पड़ेगा ।
ReplyDelete:) Bahut Badhiya
ReplyDeleteयहाँ तो पुस्तक पढ़ने की लत अख़बार पर भारी दिख रही है. बहुत ख़ूब.
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