http://kajalkumar.tk
Hahaha! Bahut badhiya!
सही है..
सामान कुछ कम है :)
पर ये बात वो 'खुशवंत सिंह' से क्यों कह रहा है :)
सरकारी बैंक वालों को परिसर में ही एक धर्मशाला खोल लेनी चाहिये।
सरकारी हैं न । कार्य सरकता है ।
hahaha ...
हड़ताल की भनक इन्हें कैसे लग गई ?
हद है! ड्राफ्ट बनवाने में इत्ता समय कहां लगता है? जबरदस्ती का व्यंग्य।
सुबह देने पर शाम तक मिल ही जाता है, नहीं तो अगले रोज.
अतिशयोक्ति हो गयी है! इतने बुरे हाल नही है!
देर बेशक लगे लेकिन काम हो तो जाता है..
हा हा हा ..क्या वाकई ??
आजकल ड्राफ्ट बनने में बहुत समय नहीं लगता. बीस मिनट में भी बनते देखा है. अब बैंक कर्मचारियों के प्राण लेने हैं क्या? :))
गलत बात!!
बहुत श्रेष्ठ और सटीक!
फिर गैर सरकारी में काहे नहीं जाते!
हा-हा-हा ...!सरकारी बैंक ...!
वैसे कितने दिन रहना पड़ा आपको..??:-)
'नौ दिन चले अढाई कोस 'यही चाल है सरकारी बंदोबस्त की .
Hahaha! Bahut badhiya!
ReplyDeleteसही है..
ReplyDeleteसामान कुछ कम है :)
ReplyDeleteपर ये बात वो 'खुशवंत सिंह' से क्यों कह रहा है :)
ReplyDeleteसरकारी बैंक वालों को परिसर में ही एक धर्मशाला खोल लेनी चाहिये।
ReplyDeleteसरकारी हैं न । कार्य सरकता है ।
ReplyDeletehahaha ...
ReplyDeleteहड़ताल की भनक इन्हें कैसे लग गई ?
ReplyDeleteहड़ताल की भनक इन्हें कैसे लग गई ?
ReplyDeleteहद है! ड्राफ्ट बनवाने में इत्ता समय कहां लगता है? जबरदस्ती का व्यंग्य।
ReplyDeleteसुबह देने पर शाम तक मिल ही जाता है, नहीं तो अगले रोज.
ReplyDeleteअतिशयोक्ति हो गयी है! इतने बुरे हाल नही है!
ReplyDeleteदेर बेशक लगे लेकिन काम हो तो जाता है..
ReplyDeleteहा हा हा ..क्या वाकई ??
ReplyDeleteआजकल ड्राफ्ट बनने में बहुत समय नहीं लगता. बीस मिनट में भी बनते देखा है. अब बैंक कर्मचारियों के प्राण लेने हैं क्या? :))
ReplyDeleteगलत बात!!
ReplyDeleteबहुत श्रेष्ठ और सटीक!
ReplyDeleteफिर गैर सरकारी में काहे नहीं जाते!
ReplyDeleteहा-हा-हा ...!
ReplyDeleteसरकारी बैंक ...!
वैसे कितने दिन रहना पड़ा आपको..??:-)
ReplyDelete'नौ दिन चले अढाई कोस 'यही चाल है सरकारी बंदोबस्त की .
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