http://kajalkumar.tk
चुनाव करवा दो मान जायेंगे :):)
वाह!बहुत सुन्दर!
जिनसे 'रिश्ता' किया अगर वही चौथ वसूल रहे हों तो फिर ये भी सहना पड़ेगा :)
Mast... is ruthne manane ka bhi alag hi maza hai... Karodo kharch ho jaate hain janaab!!!
बस यही काम रह गया है।
:):) विपक्ष तो बाद में मानेगा ..अक्सर तो साथ देने वाले दलों पर ही यह गाना सही बैठता है ..
मनाना जरूरी है क्योंकि ’जो वादा किया है, निभाना पड़ेगा,पर जाये पब्लिक चाहे,वॉल्मार्ट कार्फ़ूर जैसों को लाना पड़ेगा’
*मर जाये पब्लिक चाहे*
मज़ा जीने का तभी आता है ।
:):)..इससे ज्यादा क्या करेंगे.
अरे विपक्ष की चिंता किसे है ये गाना तो ममता दीदी के लिए गाया जा रहा है :))
तुम रूठी रहो मैं मनाता रहूंमज़ा पार्लियामेंट में आता है :)
उनके रूठने की अदा सुभानअल्ला,उनके मनाने की अदा माशाअल्ला।हम भी है वाकिफ इस शातिराने से,अब कैसे बचा देश इस याराने से।
ऐसे कैसे -डाल गलबहियां ! :)
क्या अदा है. शुभानल्लाह.
Ha,ha,ha!
रूठने मनाने का खेल रहे जारीचटकाता रहे एड़ियां अण्णा हजारी! :)
एक दृष्टि से सत्ता पक्ष और विपक्ष में कोई अंतर नहीं होता. रूठने मनाने का खेल तो इन दोनों सत्ता प्रेमियों में चलता ही रहेगा :))
तुम ऐसे तो न थे :-)
चुनाव करवा दो मान जायेंगे :):)
ReplyDeleteवाह!
ReplyDeleteबहुत सुन्दर!
जिनसे 'रिश्ता' किया अगर वही चौथ वसूल रहे हों तो फिर ये भी सहना पड़ेगा :)
ReplyDeleteMast... is ruthne manane ka bhi alag hi maza hai... Karodo kharch ho jaate hain janaab!!!
ReplyDeleteबस यही काम रह गया है।
ReplyDelete:):) विपक्ष तो बाद में मानेगा ..अक्सर तो साथ देने वाले दलों पर ही यह गाना सही बैठता है ..
ReplyDeleteमनाना जरूरी है क्योंकि
ReplyDelete’जो वादा किया है, निभाना पड़ेगा,
पर जाये पब्लिक चाहे,
वॉल्मार्ट कार्फ़ूर जैसों को लाना पड़ेगा’
*मर जाये पब्लिक चाहे*
ReplyDeleteमज़ा जीने का तभी आता है ।
ReplyDelete:):)..इससे ज्यादा क्या करेंगे.
ReplyDeleteअरे विपक्ष की चिंता किसे है ये गाना तो ममता दीदी के लिए गाया जा रहा है :))
ReplyDeleteतुम रूठी रहो मैं मनाता रहूं
ReplyDeleteमज़ा पार्लियामेंट में आता है :)
उनके रूठने की अदा सुभानअल्ला,
ReplyDeleteउनके मनाने की अदा माशाअल्ला।
हम भी है वाकिफ इस शातिराने से,
अब कैसे बचा देश इस याराने से।
ऐसे कैसे -डाल गलबहियां ! :)
ReplyDeleteक्या अदा है. शुभानल्लाह.
ReplyDeleteHa,ha,ha!
ReplyDeleteरूठने मनाने का खेल रहे जारी
ReplyDeleteचटकाता रहे एड़ियां अण्णा हजारी! :)
एक दृष्टि से सत्ता पक्ष और विपक्ष में कोई अंतर नहीं होता. रूठने मनाने का खेल तो इन दोनों सत्ता प्रेमियों में चलता ही रहेगा :))
ReplyDeleteतुम ऐसे तो न थे :-)
ReplyDelete