http://kajalkumar.tk
सटीक व्यंग्य
करप्शन के लिए एक नया ऑप्शन।
साहब, हुनरमंद...अक्लमंद हैं सो जगत के चलन और वक़्त की नब्ज़ को पहचानते हैं !
निजी कम्पनियां भी हाथ धो लेती हैं एनजीओ के साथ साथ
सुरक्षित करप्शन की नायाब जगह. आजकल ताऊ भी जोगाड लगा रहा है.:)रामराम.
बिल्कुल सही
लाख टके की बात कह दी.
बिलकुल सही बात है।
खरी बात!!
खतरे भी कम है, बहुत सुंदर
bahut hi achha vyang padhkar maza aa gaya. poonam
हा हा हा ! इसे कहते हैं एक तीर से दो शिकार !
balle balle
Nice idea!
सशक्त कार्टून!नारी-दिवस पर मातृ-शक्ति को नमन!
अरे जहाँ मिले वहीँ :)
जंहा चाह वंहा राह।
ब्लॉग पर देर से आने की माफ़ी चाहूंगी.पर आकर यक़ीनन मज़ा आगया
सटीक व्यंग्य
ReplyDeleteकरप्शन के लिए एक नया ऑप्शन।
ReplyDeleteसाहब, हुनरमंद...अक्लमंद हैं सो जगत के चलन और वक़्त की नब्ज़ को पहचानते हैं !
ReplyDeleteनिजी कम्पनियां भी हाथ धो लेती हैं एनजीओ के साथ साथ
ReplyDeleteसुरक्षित करप्शन की नायाब जगह. आजकल ताऊ भी जोगाड लगा रहा है.:)
ReplyDeleteरामराम.
बिल्कुल सही
ReplyDeleteलाख टके की बात कह दी.
ReplyDeleteबिलकुल सही बात है।
ReplyDeleteखरी बात!!
ReplyDeleteखतरे भी कम है, बहुत सुंदर
ReplyDeletebahut hi achha vyang padhkar maza aa gaya.
ReplyDeletepoonam
हा हा हा ! इसे कहते हैं एक तीर से दो शिकार !
ReplyDeleteballe balle
ReplyDeleteNice idea!
ReplyDeleteसशक्त कार्टून!
ReplyDeleteनारी-दिवस पर मातृ-शक्ति को नमन!
अरे जहाँ मिले वहीँ :)
ReplyDeleteजंहा चाह वंहा राह।
ReplyDeleteब्लॉग पर देर से आने की माफ़ी चाहूंगी.पर आकर यक़ीनन मज़ा आगया
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