जनाब ! बाउजी ने तो कमाल का जुगाड़ बैठा लिया मगर ये भी तो देखो प्रभु कि खिलाएंगे क्या इसे ! दरअसल मुल्क के हुक्मरानों की अक्ल तो घांस चरने चली गयी है फिर भला बाउजी की सवारी खाएगी क्या और पीयेगी क्या ! मेरे हिसाबदारे से तो बाउजी ने स्कूटर बेचने से पहले सलाह-मशवरा कर ही लेना चाहिए था / निगोड़े बाउजी तो अक्ल से कोरे निकले / क्यों आप क्या कहते हो !
वाह काजल जी, बाऊ जी की दूरदृष्टि.पेट्रोल की कीमत में एक पंथ दो/ तीन काज सिर्फ चारे का खर्च घूमना भी और बिना मिलावट वाला ढूध भी,और आपकी भाषा में मिनरल वाटर का खर्चा भी बचा.हुई न दूरदृष्टि
बहुत बढिया जी हमे भी दो चारे भेंस ले दो, जिस पर बेठ कर हम भारत की खोज करेगे, अरे डरो नही खाना नीरज जाट के खेत किस काम आयेगे? इतनी टिपण्णियां दी है मुफ़त मै उसे, क्यां हमारे गरीब भेंस का पेट नही भरेगा
अगर अकेला चढ़ेगा तो दिक्कत है...किराए पर चलाये कुछ पैसेंजर बिठाए तो...आम के आम गुठलियों के दाम... आइडिया बुरा नहीं है....लालू जी को इसी भैंसे ने कहाँ से कहाँ पहुंचा दिया.... बालक भैंसासुर की सेवा कर मेवा मिलेगा ....
भैंस ले लेते तो दूध का टंटा भी मिटता.
ReplyDeleteसही जुगाड़ कर लिया :)
ReplyDeleteजनाब !
ReplyDeleteबाउजी ने तो कमाल का जुगाड़ बैठा लिया मगर ये भी तो देखो प्रभु कि खिलाएंगे क्या इसे !
दरअसल मुल्क के हुक्मरानों की अक्ल तो घांस चरने चली गयी है फिर भला बाउजी की सवारी खाएगी क्या और पीयेगी क्या !
मेरे हिसाबदारे से तो बाउजी ने स्कूटर बेचने से पहले सलाह-मशवरा कर ही लेना चाहिए था /
निगोड़े बाउजी तो अक्ल से कोरे निकले / क्यों आप क्या कहते हो !
अच्छा है सवारी की सवारी भी और दूध का दूध भी, बस पार्किंग की समस्या हो सकती है।
ReplyDeleteपता नही आज हमको कार्टून नही दिख रहा है. कुछ दिक्कत है हमारे ब्राऊजर के साथ.
ReplyDeleteरामराम.
मुख्यमंत्री न देख लें
ReplyDeleteयह कार्टून
भैंस/भैंसा या समूचे जानवरों
पर भी रोड टैक्स और उस पर वैट
दोनों लगा देंगी।
वाह, भैंसा पड़ोसी के खेत में चर सकता है! पड़ोसी के स्कूटर की टंकी से पेट्रोल निकालने में शायद दिक्कत हो! :-)
ReplyDeleteहाय !
ReplyDeleteदेख मेरे देश की हालत क्या होगई भगवान
वाह काजल जी, बाऊ जी की दूरदृष्टि.पेट्रोल की कीमत में एक पंथ दो/ तीन काज सिर्फ चारे का खर्च घूमना भी और बिना मिलावट वाला ढूध भी,और आपकी भाषा में मिनरल वाटर का खर्चा भी बचा.हुई न दूरदृष्टि
ReplyDeleteट्रफिक जाम भी कम, कच्चे रास्ते निकल लेंगे ।
ReplyDeleteहा...हा...हा...बेचारे बाउजी........"
ReplyDeleteamitraghat.blogspot.com
रोड़ टेक्स कितना भरना पडेगा?
ReplyDelete.जुगाड़ तो अच्छा है ..पार्किंग के बाहर अब चारे के खोमचे लगाने होंगे
ReplyDeleteहा हा हा ! मरेगा बेचारा !
ReplyDeleteपुराना स्कूटर १०००० में बेच ४०००० का भैंसा खरीद लिया।
गरीब धोखा खा गया ।
काजल भाई आपसे शिकायत है कि भविष्य में ऐसे कार्टून बनाते समय सर्वांग-दर्शन कराया करें क्योंकि लोग भैंस और भैंसा में कन्फ्यूज़ हो रहे हैं
ReplyDeleteयह भी नहीं हो सकता, चारा खिलाने के लिये धरती ही नहीं बची है.
ReplyDeleteमेरे ख्याल से तो गधा खरीदना चाहिए था। यमराज समझने की भूल भी नहीं होती। फिर आपकी इच्छा कुछ भी खरीदो।
ReplyDeleteमजेदार कार्टून....लेकिन इसे खिलाएंगे क्या?..
ReplyDeleteबहुत बढिया जी हमे भी दो चारे भेंस ले दो, जिस पर बेठ कर हम भारत की खोज करेगे, अरे डरो नही खाना नीरज जाट के खेत किस काम आयेगे? इतनी टिपण्णियां दी है मुफ़त मै उसे, क्यां हमारे गरीब भेंस का पेट नही भरेगा
ReplyDeletenice
ReplyDeleteअगर अकेला चढ़ेगा तो दिक्कत है...किराए पर चलाये कुछ पैसेंजर बिठाए तो...आम के आम गुठलियों के दाम...
ReplyDeleteआइडिया बुरा नहीं है....लालू जी को इसी भैंसे ने कहाँ से कहाँ पहुंचा दिया....
बालक भैंसासुर की सेवा कर मेवा मिलेगा ....
...चलो कम से कम मैनटेनेंस का झंझट भी नहीं रहेगा!!!!
ReplyDeleteek bail garee kharidna parega.
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