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18 (कमेंट करने के लिए राइट क्लिक कर नए पेज में खोलें):
सचमुच जीना हराम कर रखा है सालों ने !
चित्रकार जरा मधुमखियों पर नजरे ईनायत हो जाय ?
कछुआ छाप का विज्ञापन लगा दो थाने में...फटाफट!!
....रोचक भाव!!!!
nice
बहुत बडिया कल से कुछ दिन छुट्टी पर रहूँगी। ब्लाग पर नही आ पाऊँगी। शुभकामनायें
हा हा हा मच्छरों से बचने के लिए कछुओं को फ़ोन ..ये वर्दी वाले कछुए तो पिक्चरों में भी लेट आते हैं ...बढिया है एकदम खालिस
अजय कुमार झा
मजेदार. मच्छरों से हलाकान लोगों के लिए एक मच्छरिया ग़ज़ल और एक मच्छरचरितमानस यहाँ पर भी है -
http://raviratlami.blogspot.com/2008/03/blog-post.html
मच्छरों ने थोडा बहुत खून पी भी लिया तो क्या? तोंद पर तो कोई फ़र्क नजर नही आता.:) जबरन बदनाम कर रहे हैं मच्छरों को.
रामराम.
हाँ अब यही काम रह गया है :)
bina ghoos ke police bale kahin nahi jate. hhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh
मच्छरों ने थोडा बहुत खून पी भी लिया तो क्या?
बहुत खूब, लाजबाब !
समीर जी का सुझाव ठीक है.
हा! हा! बचाओ! किड (बच्चा) नैप (नींद) नहीं ले पा रहा! :)
बिल्कुल सटीक है!
अबे क्यो डर रहा है, इन को किसी भी केस मै फ़ंसा कर जेल मे डाल दे.....
समीर जी का सुझाव ठीक है...
पुलिस वाले कुछ नहीं करते चलो टाइम पास करने के लिए नया काम अच्छा रहेगा
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