Wednesday, November 5, 2008

मेरी मुहिम


मेरी मुहिम साफ़ है
मैंने ज़मीन बाँट
कर देश बनाए,
पानी बांटा सागर का,
फिर बांटा आकाश...

कोई मुगा़लते में न रहे
मेरी मुहिम साफ़ है.

7 comments:

  1. thik hai jee saf hee rakhna,narayan narayan

    ReplyDelete
  2. very good distribution
    भावों की अभिव्यक्ति मन को सुकुन पहुंचाती है ।
    लिखते रहिए, लिखने वालों की मंज़िल यही है ।
    कविता,गज़ल के लिए मेरे ब्लोग पर स्वागत है ।

    ReplyDelete
  3. ब्लोगिंग जगत में आपका हार्दिक स्वागत है. लिखते रहिये. दूसरों को राह दिखाते रहिये. आगे बढ़ते रहिये, अपने साथ-साथ औरों को भी आगे बढाते रहिये. शुभकामनाएं.
    --
    साथ ही आप मेरे ब्लोग्स पर सादर आमंत्रित हैं. धन्यवाद.

    ReplyDelete
  4. कल 07/09/2011 को आपकी यह पोस्ट नयी पुरानी हलचल पर लिंक की जा रही हैं.आपके सुझावों का स्वागत है .
    धन्यवाद!

    ReplyDelete
  5. बहुत बढि़या ।

    ReplyDelete
  6. बहुत सुन्दर प्रस्तुति!
    आपको सूचित करते हुए हर्ष हो रहा है कि-
    आपकी इस प्रविष्टी की चर्चा कल शनिवार के चर्चा मंच पर भी होगी!
    सूचनार्थ...!

    ReplyDelete

LinkWithin

Blog Widget by LinkWithin