शनिवार, 5 जनवरी 2013

कार्टून:- (भाग-2) बड़े साहि‍त्‍यकार की कहानी



19 टिप्‍पणियां:

  1. एक शब्द की नींदवाली गोली ..... दिन में 5 बार

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  2. बहुत सुन्दर प्रस्तुति!
    आपकी इस प्रविष्टी की चर्चा कल रविवार (06-01-2013) के चर्चा मंच-1116 (जनवरी की ठण्ड) पर भी होगी!
    --
    कभी-कभी मैं सोचता हूँ कि चर्चा में स्थान पाने वाले ब्लॉगर्स को मैं सूचना क्यों भेजता हूँ कि उनकी प्रविष्टि की चर्चा चर्चा मंच पर है। लेकिन तभी अन्तर्मन से आवाज आती है कि मैं जो कुछ कर रहा हूँ वह सही कर रहा हूँ। क्योंकि इसका एक कारण तो यह है कि इससे लिंक सत्यापित हो जाते हैं और दूसरा कारण यह है कि किसी पत्रिका या साइट पर यदि किसी का लिंक लिया जाता है उसको सूचित करना व्यवस्थापक का कर्तव्य होता है।
    सादर...!
    नववर्ष की मंगलकामनाओं के साथ-
    सूचनार्थ!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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  3. गम्भीर समस्या,धन्यबाद।

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  4. इस डिप्रेशन इलाज़ बहुत जरुरी है... :)

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  5. क्या बात है ...बढिया है जी :)

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  6. डाक्टर: "है मेरे पास ही पुस्तक लिखी हुई तैयार,
    जो आप करदे विमोचन तो मानूंगा आभार"
    बड़ा साहित्यकार: "लिखा है उसमे क्या ये तो बताईये सरकार,
    मैं आप ही को दिखाने को आऊंगा हर बार."

    डाक्टर: "लिखे है उसमे विमोचन के एक सौ उदगार,
    जो आप चाहते है 'मोचन' तो फीस एक हज़ार."
    http://aatm-manthan.com

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  7. बहुत सही बीमारी है.:) इलाज करना पडेगा.:)

    रामराम.

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  8. इस बीमारी का इलाज़ तो मुश्किल है.

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  9. हा हा हा ! इनका हाल भी कवियों जैसा है। :)

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  10. डॉ की चितवन कह रही है ला -इलाज़ है रोग ,घर में ही पुस्तक विमोचन का नाटक करो .यही प्लेसिबो काट है इस बीमारी की जिसे विमोचन बीमारी कहतें हैं .

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  11. ये मजाक नहीं है, बिल्कुल सही बात है।

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